नमस्कार ! आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाए !
और आप से निवेदन है कि है हम सुरक्षित होली ही खेलेंगे तथा प्राकृतिक रंगो का प्रयोग करेंगे और प्यार खुशियों और हर्षोउल्लाष के साथ होली का त्यौहार मनाये।
अब बात करते है होली पर्व के पीछे की मान्यताओ की। वैसे तो इसके पीछे बहुत सी मान्यताए और कहानिया सुनाई जाती है परन्तु इन सब में सबसे ऊपर कहानी आती है होलिका (जो की हिरणकश्यप की बहन थी )और हिरणाकश्यप के पुत्र प्रलाह्द की जो की विष्णु जी का भक्त था। कहते है कि होलिका आग में नहीं जलती थी इसीलिए हिरणाकश्यप ने प्रल्हाद को जलाने के लिए उसे होलिका के साथ जला दिया था परन्तु उसमे होलिका भी जल गयी थी परन्तु ये कहानी कुछ जमती नहीं जब प्रलाह्द को ही जलाना था तो उसी को जला देते होलिका को क्यों आग में बिठाया। तो इस कहानी से ये स्पष्ट हो जाता है कि उस समय भी समाज में नारियो को जलाने की निर्मम प्रथा चलती थी
दूसरी मान्यता है कि भारत की परम्परा रही है कि यहां के निवासी नई फसल आने पर उत्स्व मनाते है जिसे होली के नाम से जाना जाता है और ये तार्किक भी है ,एक दो बात इसमें भी है जो समझ नहीं आती लेकिन फिर भी हम इस तर्क को मान्यता दे सकते है |
लेकिन विडंबना देखो मेरे देश की हम नारी को जलाने वाली घटनाओ को बड़े ही गर्व से अपनी पाठ्य पुस्तकों में शामिल करते है और अपने बच्चो को अप्रत्यक्ष रूप से हिंसा की सिख देते है। अब ये आप पे छोड़ता कि आप अपने बच्चो को क्या सिखाते हो। जय हिन्द जय भारत
और आप से निवेदन है कि है हम सुरक्षित होली ही खेलेंगे तथा प्राकृतिक रंगो का प्रयोग करेंगे और प्यार खुशियों और हर्षोउल्लाष के साथ होली का त्यौहार मनाये।
अब बात करते है होली पर्व के पीछे की मान्यताओ की। वैसे तो इसके पीछे बहुत सी मान्यताए और कहानिया सुनाई जाती है परन्तु इन सब में सबसे ऊपर कहानी आती है होलिका (जो की हिरणकश्यप की बहन थी )और हिरणाकश्यप के पुत्र प्रलाह्द की जो की विष्णु जी का भक्त था। कहते है कि होलिका आग में नहीं जलती थी इसीलिए हिरणाकश्यप ने प्रल्हाद को जलाने के लिए उसे होलिका के साथ जला दिया था परन्तु उसमे होलिका भी जल गयी थी परन्तु ये कहानी कुछ जमती नहीं जब प्रलाह्द को ही जलाना था तो उसी को जला देते होलिका को क्यों आग में बिठाया। तो इस कहानी से ये स्पष्ट हो जाता है कि उस समय भी समाज में नारियो को जलाने की निर्मम प्रथा चलती थी
दूसरी मान्यता है कि भारत की परम्परा रही है कि यहां के निवासी नई फसल आने पर उत्स्व मनाते है जिसे होली के नाम से जाना जाता है और ये तार्किक भी है ,एक दो बात इसमें भी है जो समझ नहीं आती लेकिन फिर भी हम इस तर्क को मान्यता दे सकते है |
लेकिन विडंबना देखो मेरे देश की हम नारी को जलाने वाली घटनाओ को बड़े ही गर्व से अपनी पाठ्य पुस्तकों में शामिल करते है और अपने बच्चो को अप्रत्यक्ष रूप से हिंसा की सिख देते है। अब ये आप पे छोड़ता कि आप अपने बच्चो को क्या सिखाते हो। जय हिन्द जय भारत
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